सोयाबीन (Soybean), मुख्य मौसम: ख़रीफ़। जून–जुलाई में बुवाई, सितंबर–अक्टूबर में कटाई। प्रमुख उत्पादक राज्य: मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान। मिट्टी का आदर्श pH 6.0–7.0 और पूरे मौसम की पानी की जरूरत लगभग 450 मिमी है।
सोयाबीन मध्य भारत की प्रमुख तिलहन फसल है और लगभग पूरी तरह वर्षा आधारित है, यानी मानसून की हर अनियमितता सीधे पैदावार पर असर डालती है। हर हफ़्ते खेत की उपग्रह तस्वीर और मौसम पूर्वानुमान देखकर सिंचाई अंदाज़े की बजाय ज़रूरत के हिसाब से की जा सकती है।
बुवाई कैलेंडर और मौसम
सोयाबीन का मुख्य मौसम ख़रीफ़ है। जून–जुलाई में बुवाई, सितंबर–अक्टूबर में कटाई। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, इन राज्यों में यह फसल सबसे बड़े क्षेत्र में उगाई जाती है। विस्तृत राज्यवार जानकारी के लिए हमारी क्षेत्रीय स्मार्ट खेती गाइड देखें।
सिंचाई और मिट्टी की नमी
सोयाबीन के लिए मिट्टी का आदर्श pH 6.0–7.0 है और पूरे मौसम में लगभग 450 मिमी पानी की जरूरत होती है। हर हफ़्ते खेत की उपग्रह तस्वीर और मौसम पूर्वानुमान देखकर सिंचाई अंदाज़े की बजाय ज़रूरत के हिसाब से की जा सकती है।
प्रमुख रोग और कीट
- पीला मोज़ेक विषाणु (Yellow mosaic virus), सफेद मक्खी से फैलता है; गर्म-सूखे मौसम में मक्खी का दबाव बढ़ता है, जिसकी चेतावनी तापमान डेटा से मिलती है।
- मौसम पर नज़र रखकर जोखिम वाले दिनों में फसल की जाँच करें; कोई भी दवा कृषि विशेषज्ञ या KVK की सलाह से ही डालें।
VarshaKrishi कैसे मदद करता है
VarshaKrishi उपग्रह चित्रों (Sentinel-2, बादलों के पार देखने वाला Sentinel-1 रडार) और मौसम के आधार पर आपके अपने खेत के बारे में हर हफ़्ते एक WhatsApp संदेश भेजता है: खेत में क्या बदला, मौसम क्या कहता है, और इस हफ़्ते क्या जाँचें। खेत में कुछ लगाने की ज़रूरत नहीं। देखें सेवा हर किसान के लिए मुफ़्त है।
फसल सलाह WhatsApp पर: आपके खेत की हर हफ़्ते की जानकारी। यह संदेश कैसे बनता है और उपग्रह क्या नहीं देख सकता: तरीक़े और सीमाएँ (अंग्रेज़ी में)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सोयाबीन कब बोयें?
मानसून से 75–100 मिमी वर्षा मिलने के बाद (आमतौर पर जून के अंतिम या जुलाई के पहले सप्ताह) बुवाई सबसे सुरक्षित है। हर हफ़्ते खेत की उपग्रह तस्वीर और मौसम पूर्वानुमान देखकर सिंचाई अंदाज़े की बजाय ज़रूरत के हिसाब से की जा सकती है।
सोयाबीन को कितने पानी की जरूरत होती है?
सोयाबीन को मौसम में लगभग 450 मिमी पानी चाहिए, जो सामान्य मानसून में वर्षा से मिल जाता है। फूल और फली भरने (60–90 दिन) के दौरान सूखा पड़े तो एक जीवन-रक्षक सिंचाई सबसे ज्यादा फायदा देती है।
सोयाबीन की निगरानी में उपग्रह कैसे मदद करता है?
VarshaKrishi उपग्रह चित्रों (Sentinel-2, बादलों के पार देखने वाला Sentinel-1 रडार) और मौसम के आधार पर आपके अपने खेत के बारे में हर हफ़्ते एक WhatsApp संदेश भेजता है: खेत में क्या बदला, मौसम क्या कहता है, और इस हफ़्ते क्या जाँचें। खेत में कुछ लगाने की ज़रूरत नहीं। देखें सेवा हर किसान के लिए मुफ़्त है।
अंग्रेज़ी में गाइड पढ़ें: Soybean farming guide